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अद्भुत अनुभव शब्द अध्ययन 


मनीषा 
maneeshashukla76@rediffmail.com 

मानव सभ्यता  के लिए भाषा अद्भुत उपलब्धि है। यह भाषा ही मनुष्य को सृष्टि और समाज से जोड़ती है। भाषा का उद्भव भी उतना ही अद्भुत है क्योकि दुनिया भर में अलग अलग मानव समूह अलग अलग भाषाओ का प्रयोग करते हैं। भाषा के उद्भव और इसके विकास को मनुष्य ने भाषा विज्ञान के रूप में पढ़ने की व्यवस्था बनायीं है लेकिन आज तक वह इसका आदि और अंत तलाश नहीं सका है। आज प्रचलन में जितने भी शब्द हैं ,उनका अध्ययन अपने आप में अद्भुत अनुभव है। 


वास्तव में दुनियाभर की भाषाओं में शब्द निर्माण व अर्थस्थापना की प्रक्रिया एक-सी है। विवाहिता स्त्री के जोड़ीदार के लिए अनेक भाषाओं के शब्दों में अधीश, पालक, गृहपति जैसे एक से रूढ़ भाव हैं। हिन्दी में ‘पति’ सर्वाधिक बरता जाने वाला शब्द है। अंग्रेजी में वह हसबैंड है। फ़ारसी में खाविन्द है। संस्कृत में शालीन। भारत-ईरानी परिवार की भाषाओं में राजा, नरेश, नरश्रेष्ठ, वीर, नायक जैसे शब्दों में “पालक-पोषक” जैसे भावों का भी विस्तार हुआ। यह शब्द पहले आश्रित, विजित या प्रजा के साथ सम्बद्ध हुआ, फिर किसी न किसी तौर पर स्त्री के जीवनसाथी की अभिव्यक्ति इन सभी रूपों में होने लगी।
दम्पति का अर्थ भी गृहपति ही है। यह दिलचस्प है कि पालक, भरतार यानी भरण-पोषण करने वाला जैसी अभिव्यक्ति के अलावा ‘पति’ जैसी व्यवस्था में रहने अथवा निवासी होने का भाव भी आश्चर्यजनक रूप में समान है। अंग्रेजी के हसबैंड शब्द को लीजिए जिसमें शौहर, पति, खाविंद, नाथ या स्वामी का भाव है। पाश्चात्य भाषा विज्ञानियों के मुताबिक पुरानी इंग्लिश में इसका रूप हसबौंडी था। विलियम वाघ स्मिथ इसे बोंडा बताते हैं, जिसका अर्थ है स्वामी, मालिक।
खाविंद अर्थात स्वामी-फ़ारसी में पति को ख़ाविंद कहते हैं जो मूल फ़ारसी खावंद का अपभ्रंश है। इसका अर्थ है शौहर, पति-परमेश्वर, भरतार, सरताज और गृहपति आदि। घरबारी जिसका घरु-दुआर हो-गृहस्थ के लिए घरबारी शब्द बना है घर और द्वार से। घरद्वार एक सामासिक पद है, जिसमें द्वार भी घर जैसा ही अर्थ दे रहा है। द्वार से ‘द’ का लोप होकर ‘व’ बचता है जो अगली कड़ी में ‘ब’ में तबदील होता है। इस तरह घरद्वार से घरबार प्राप्त होता है, जिससे बनता है घरबारी।
गृहपति भी है दम्पति। दम्पति का एक अन्य अर्थ है गृहपति। पुराणों में अग्नि, इन्द्र और अश्विन को यह उपमा मिली हुई है। दम्पति का एक अन्य अर्थ है जोड़ा, पति-पत्नी, एक मकान के दो स्वामी अर्थात स्त्री और पुरुष। आजकल सिर्फ़ पति-पत्नी के अर्थ में दम्पति शब्द का प्रयोग होने लगा है जबकि इसमें घरबारी युगल का भाव है। दम में है आश्रय। यह जो दम शब्द है, यह भारोपीय मूल का है और इसमें आश्रय का भाव है। दम यानी डोम यानी गुम्बद। गुम्बद के लिए अंग्रेजी का डोम शब्द हिन्दी के लिए जाना-पहचाना है। सभ्यता के विकास क्रम में डोम मूलतः आश्रय था। सर्वप्रथम जो छप्पर मनुष्य ने बनाया वही डोम था। बाद में स्थापत्य कला का विकास होते-होते डोम किसी भी भवन के मुख्य गुम्बद की अर्थवत्ता पा गया मगर इसमें मुख्य कक्ष का आशय जुड़ा है जहां सब एकत्र होते हैं। लैटिन में डोमस का अर्थ घर होता है, जिससे घरेलू के अर्थ वाला डोमेस्टिक जैसा शब्द भी बनता है।

वास्तु 


  • वास्तु एक प्राचीन विज्ञान है, जो हमें बताता है कि घर, ऑफिस, व्यवसाय इत्यादि में कौन सी चीज होनी चाहिए और कौन सी नहीं. साथ हीं हमें यह भी बतलाता है कि किस चीज के लिए कौन सी दिशा सही होगी. यह हमें बताता है कि वास्तु दोषों का निवारण कैसे किया जा सकता है. यह मिथक या अन्धविश्वास पर आधारित बातें नहीं बताता है. कौन-सा कमरा किस दिशा में ज्यादा अच्छा रहेगा, कौन से पौधे आपको घर में लगाने चाहिए और कौन से नहीं इत्यादि. तो आइए जानते हैं कि वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के लिए क्या-क्या सही है और क्या-क्या गलत।
 

  • घर के लिए कुछ महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स :
  • पूजा घर उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण में बनाना सबसे अच्छा रहता है. अगर इस दिशा में पूजा घर बनाना सम्भव नहीं हो रहा हो, तो उत्तर दिशा में पूजा घर बनाया जा सकता है. लेकिन ध्यान रखें कि ईशान कोण सर्वश्रेष्ठ दिशा है.

  • पूजा घर से सटा हुआ या पूजा घर के ऊपर या नीचे शौचालय नहीं होना चाहिए.
  • पूजा घर में प्रतिमा स्थापित नहीं करनी चाहिए क्योंकि घर में प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति का ध्यान उस तरह से नहीं रखा जा सकता है जैसा कि रखा जाना चाहिए. अतः छोटी मूर्तियाँ और चित्र हीं पूजा घर में लगाने चाहिए.
  • रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा सबसे अच्छी होती है.सीढ़ी के नीचे पूजा घर नहीं बनाना चाहिए.

  • फटे हुए चित्र, या खंडित मूर्ति पूजा घर में बिल्कुल नहीं होनी चाहिए.

  • पूजा घर और रसोई या बेडरूम एक हीं कमरे में नहीं होना चाहिए.
  • घर के मालिक का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए. अगर इस दिशा में सम्भव न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प है.
  • गेस्ट रूम उत्तर-पूर्व की ओर होना चाहिए. अगर उत्तर-पूर्व में कमरा बनाना सम्भव न हो, तो उत्तर पश्चिम दिशा दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प है.
  • उत्तर-पूर्व में किसी का भी बेडरूम नहीं होना चाहिए.
  • शौचालय और स्नानघर दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना सर्वश्रेष्ठ है.
  • घर की सीढ़ी सामने की ओर से नहीं होनी चाहिए, और सीढ़ी ऐसी जगह पर होनी चाहिए कि घर में घूसने वाले व्यक्ति को यह सामने नजर नहीं आनी चाहिए.
  • सीढ़ी के पायदानों की संख्या विषम 21, 23, 25 इत्यादि होनी चाहिए.
  • सीढ़ी के नीचे शौचालय, रसोई, स्नानघर, पूजा घर इत्यादि नहीं होने चाहिए. सीढ़ी के नीचे कबाड़ भी नहीं रखना चाहिए.
  • सीढ़ी के नीचे कुछ उपयोगी सामान रख सकते हैं और सीढ़ी के नीचे रखे हुए सामान सुसज्जित होने चाहिए.
  • घर का कोई भी रैक खुला नहीं होना चाहिए. उसमें पल्ले जरुर लगाने चाहिए.
  • घर में कबाड़ नहीं रखना चाहिए.
  • कमरे की लाइट्स पूर्व या उत्तर दिशा में लगी होनी चाहिए.
  • घर के ज्यादातर कमरों की खिड़कियाँ और दरवाजे उत्तर या पूर्व दिशा में खुलने चाहिए.
  • सीढ़ी पश्चिम दिशा में होनी चाहिए.
  • घर का मुख्य दरवाजा दक्षिणमुखी नहीं होना चाहिए. अगर मजबूरी में दक्षिणमुखी दरवाजा बनाना पड़ गया हो, तो दरवाजे के सामने एक बड़ा सा आईना लगा दें.
  • घर के प्रवेश द्वार में ऊं या स्वस्तिक बनाएँ या उसकी थोड़ी बड़ी आकृति लगाएँ.
  • पूजा घर या उत्तर-पूर्व दिशा में जल से भरकर कलश रखें.
  • शयनकक्ष में भगवान की या धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी तस्वीर नहीं लगानी चाहिए.
  • ताजमहल एक मकबरा है, इसलिए न तो इसकी तस्वीर घर में लगानी चाहिए. और न हीं इसका कोई शो पीस घर में रखना चाहिए.
  • जंगली जानवरों के फोटो घर में नहीं रखने चाहिए.
  • पानी के फुहारे को घर में नहीं लगाना चाहिए. क्योंकि इससे धन नहीं ठहरता है.
  • नटराज की तस्वीर या मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इसमें शिवजी ने विकराल रूप लिया हुआ है.

बच्चो को अवश्य पढाये श्रीमद्भगवद्गीता 


श्रीमद्भगवद्गीता एक विशुध्द वैज्ञानिक ग्रन्थ है जो मानव विज्ञान और मनोविज्ञान की सलीके से व्याख्या करता है। इस ग्रन्थ को केवल आध्यात्मिक या धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक ज्ञान के लिए सभी को अवश्य पढना चाहिए। बच्चो और युवाओ के लिए तो यह एक औषधि एवं मार्गदर्शक जैसी है। कल्याण की इच्छा वाले मनुष्यों को उचित है कि मोह का त्याग कर अतिशय श्रद्धा-भक्तिपूर्वक अपने बच्चों को अर्थ और भाव के साथ श्रीगीताजी का अध्ययन कराएँ। स्वयं भी इसका पठन और मनन करते हुए भगवान की आज्ञानुसार साधन करने में समर्थ हो जाएँ क्योंकि अतिदुर्लभ मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर अपने अमूल्य समय का एक क्षण भी दु:खमूलक क्षणभंगुर भोगों के भोगने में नष्ट करना उचित नहीं है। गीताजी का पाठ आरंभ करने से पूर्व निम्न श्लोक को भावार्थ सहित पढ़कर श्रीहरिविष्णु का ध्यान करें--


अथ ध्यानम्
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्यनाभं सुरेशं 
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं 
वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।
भावार्थ : जिनकी आकृति अतिशय शांत है, जो शेषनाग की शैया पर शयन किए हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो ‍देवताओं के भी ईश्वर और संपूर्ण जगत के आधार हैं, जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं, नीलमेघ के समान जिनका वर्ण है, अतिशय सुंदर जिनके संपूर्ण अंग हैं, जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किए जाते हैं, जो संपूर्ण लोकों के स्वामी हैं, जो जन्म-मरण रूप भय का नाश करने वाले हैं, ऐसे लक्ष्मीपति, कमलनेत्र भगवान श्रीविष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।

यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुत: स्तुन्वन्ति दिव्यै: स्तवै-
र्वेदै: साङ्गपदक्रमोपनिषदैर्गायन्ति यं सामगा:।
ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो-
यस्तानं न विदु: सुरासुरगणा देवाय तस्मै नम:।।
भावार्थ : ब्रह्मा, वरुण, इन्द्र, रुद्र और मरुद्‍गण दिव्य स्तोत्रों द्वारा जिनकी स्तुति करते हैं, सामवेद के गाने वाले अंग, पद, क्रम और उपनिषदों के सहित वेदों द्वारा जिनका गान करते हैं, योगीजन ध्यान में स्थित तद्‍गत हुए मन से जिनका दर्शन करते हैं, देवता और असुर गण (कोई भी) जिनके अन्त को नहीं जानते, उन (परमपुरुष नारायण) देव के लिए मेरा नमस्कार है।
इन मंत्रो के जप के साथ ही गीताध्ययन आरम्भ किया जाना चाहिए। इससे अतिशय एकाग्रता आती है और मस्तिष्क व्याख्या के अनुकूल कतियाशील होता है। 

भारतीय संस्कृति की सहिष्णु प्रकृति


संजय तिवारी 

सहिष्णुता हमारी संस्कृति की विशेषता है। कह सकते हैं कि सहिष्णुता ही भारतीय संस्कृति की मूल प्रकृति है। भारतीय तत्व कभी असहिष्णु हो ही नहीं सकता। यही सहिष्णुता इसे विश्व बन्धुत्व से व्यापकता देती है और भारत को जगद्गुरु की संज्ञा से विश्व परिभाषित करता है। यह सहिष्णु तत्व जगत के कई मज़हबों में शून्य है। इसी शून्यता के कारण मजहबी विवाद पैदा होते हैं।  
भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि हजारों वर्षों के बाद भी यह संस्कृति आज भी अपने मूल स्वरूप में जीवित है, जबकि मिस्र, असीरिया, यूनान और रोम की संस्कृतियों अपने मूल स्वरूप को लगभग विस्मृत कर चुकी हैं। भारत में नदियों, वट, पीपलजैसे वृक्षों, सूर्य तथा अन्य प्राकृतिक देवी- देवताओं की पूजा अर्चना का क्रम शताब्दियों से चला आ रहा है। देवताओं की मान्यता, हवन और पूजा-पाठ की पद्धतियों की निरन्तरता भी आज तक अप्रभावित रही हैं। 



वेदों और वैदिक धर्म में करोड़ों भारतीयों की आस्था और विश्वास आज भी उतना ही है, जितना हज़ारों वर्ष पूर्व था। गीता और उपनिषदों के सन्देश हज़ारों साल से हमारी प्रेरणा और कर्म का आधार रहे हैं। किंचित परिवर्तनों के बावजूद भारतीय संस्कृति के आधारभूत तत्त्वों, जीवन मूल्यों और वचन पद्धति में एक ऐसी निरन्तरता रही है, कि आज भी करोड़ों भारतीय स्वयं को उन मूल्यों एवं चिन्तन प्रणाली से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं और इससे प्रेरणा प्राप्त करते हैं।



भारतीय संस्कृति की सहिष्णु प्रकृति ने उसे दीर्घ आयु और स्थायित्व प्रदान किया है। संसार की किसी भी संस्कृति में शायद ही इतनी सहनशीलता हो, जितनी भारतीय संस्कृति में पाई जाती है। भारतीय हिन्दू किसी देवी- देवता की आराधना करें या न करें, पूजा-हवन करें या न करें, आदि स्वतंत्रताओं पर धर्म या संस्कृति के नाम पर कभी कोई बन्धन नहीं लगाये गए। इसीलिए प्राचीन भारतीय संस्कृति के प्रतीक हिन्दू धर्म को धर्म न कहकर कुछ मूल्यों पर आधारित एक जीवन-पद्धति की संज्ञा दी गई और हिन्दू का अभिप्राय किसी धर्म विशेष के अनुयायी से न लगाकर भारतीय से लगाया गया। भारतीय संस्कृति के इस लचीले स्वरूप में जब भी जड़ता की स्थिति निर्मित हुई तब किसी न किसी महापुरुष ने इसे गतिशीलता प्रदान कर इसकी सहिष्णुता को एक नई आभा से मंडित कर दिया। भारत में इस्लामी संस्कृति का आगमन भी अरबों, तुर्कों और मुगलों के माध्यम से हुआ। इसके बावजूद भारतीय संस्कृति का पृथक अस्तित्व बना रहा और नवागत संस्कृतियों से कुछ अच्छी बातें ग्रहण करने में भारतीय संस्कृति ने संकोच नहीं किया। ठीक यही स्थिति यूरोपीय जातियों के आने तथा ब्रिटिश साम्राज्य के कारण भारत में विकसित हुई ईसाई संस्कृति पर भी लागू होती है। 
यद्यपि ये संस्कृतियां अब भारतीय संस्कृतियों का अभिन्न अंग है, तथापि ‘भारतीय इस्लाम’ एवं ‘भारतीय ईसाई’ संस्कृतियों का स्वरूप विश्व के अन्य इस्लामी और ईसाई धर्मावलम्बी देशों से कुछ भिन्न है। इस भिन्नता का मूलभूत कारण यह है कि भारत के अधिकांश मुसलमान और ईसाई मूलत: भारत भूमि के ही निवासी हैं। सम्भवत: इसीलिए उनके सामाजिक परिवेश और सांस्कृतिक आचरण में कोई परिवर्तन नहीं हो पाया और भारतीयता ही उनकी पहचान बन गई।

नोटबंदी :


दिक्कते तात्कालिक 


 जनसामान्य के लिए अच्छे दिन शुरू 





नोट बंदी को लेकर देश में कई तरह की बाते की जा रही है। सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है तो विपक्ष के लोग कई तरह के आरोप लगा रहे है। पुराने नोट बंद होने के बाद से ही नए नोट मिलने शुरू हो चुके हैं लेकिन लोगों को कुछ परेशानियां भी हो रही हैं। वहीं, लोगों के मन में अब ये सवाल उठ रहे हैं कि इस फैसले से आखिर देश, इकोनॉमी, सरकार और आम आदमी को क्या हासिल होने वाला है?  बड़े नोट बंद होने से इकोनॉमी में कोई गिरावट नहीं आएगी। एक क्वार्टर में कुछ सुस्ती देखने को मिल सकती है। महंगाई थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन इस कवायद का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि सरकार की आर्थिक हालत मजबूत होती दिख रही है। वास्तव में नोट बंदी के बाद देश किस दिशा में जाने वाला है , इसी विषय से जुड़े सवालो के जवाब दे रहे है अर्थ विस्तार संस्थान, नयी दिल्ली के  वरिष्ठ आर्थिक विश्लेषक डॉ रवि पांडेय -

Q: सरकार के बड़े फैसले से देश को क्या मिला?
 ब्लैकमनी का सफाया:लोगों के पास पहले से जमा ब्लैकमनी बेकार हो गई। इससे बेईमानी से कमाई या छुपाई गई रकम की काफी हद तक सफाई हो गई। सरकार मजबूत हुई। यूटिलिटी बिल्स के पेमेंट के लिए 72 घंटे की और छूट दी गई थी जिसे बाद में २४ तक कर दिया गया । इस अफरातफरी में कई लोग कैश खपाने के लिए बकाया सरकारी बिल जमा कर रहे हैं। सरकार के ऐसे कई डिपार्टमेंट्स को रेवेन्यू मिल रहा है जाे पहले घाटे में चल रहे थे। कई विभाग घाटे से बाहर आएंगे। कुल मिलाकर, सरकार के पास पैसा आ रहा है। इस प्रक्रिया से  करप्शन पर लगाम लगी। पिछले गुरुवार को ही महाराष्ट्र का एक अफसर इसलिए अरेस्ट हो गया, क्योंकि उसने रिश्वत में 100 रुपए के नोट लेने की डिमांड कर दी। भ्रष्ट अफसर और कर्मचारी अब रिश्वत में कैश लेने से डर रहे हैं। 

Q: देश की अर्थव्यवस्था को इससे क्या हासिल हो रहा है ? 
 बहुत फ़ायदा हुआ है। देश कैशलेस इकोनॉमी की ओर आगे बढ़ गया। अगले कुछ महीने नए नोट सर्कुलेशन में आने तक लोग कैशलेस ट्रांजैक्शन करेंगे। छह महीने में नए नोट सर्कुलेशन में आने और करंसी फ्लो आने तक खरीद-फरोख्त में थोड़ी कमी आएगी। इससे एक क्वार्टर में इकोनॉमी में मंदी नजर आ सकती है। डिमांड घटने से महंगाई थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन इकोनॉमी में कोई गिरावट नहीं आएगी। अभी तक जगह जगह रोक कर रखे गए 500-1000 के नोट बैंक के पास जा रहे हैं, यानी बैंकों की लिक्विडिटी बढ़ रही है। बैंकों का ये पैसा सीधे बॉन्ड मार्केट में जाएगा। इससे म्यूचुअल फंड में अच्छा रिटर्न मिल सकता है।
Q:इससे सिस्टम में क्या बदलाव आएगा?
A: सबसे बड़ा बदलाव कैश ट्रांजैक्शन में होगा। बड़ी खरीददारी (मकान, महंगा फर्नीचर) में कई बार लोग ब्लैकमनी खपाने की सोचते हैं। इसकी एक वजह यह होती है कि कैश में खरीदने पर कई बार प्राइस कम हो जाती है। पुराने नोट बंद होने से कुछ दिन तक कैश डीलिंग खत्म हो जाएगी। ना तो लोग कैश देंगे और ना ही बिजनेसमैन लेंगे। ब्लैकमनी पर पूरी तरह लगाम लगा दी गई है।

Q: आम आदमी पर किस तरह का असर पड़ेगा?
A: आम आदमी के लिए बहुत तकलीफ वाली स्थिति नहीं है। सरकार के फैसले से जो परेशानियां सामने आ रही हैं, वे कुछ वक्त के बाद स्टेबलाइज हो जाएंगी। मार्केट में ब्लैकमनी कम, व्हाइट ज्यादा हो जाएगी। इकोनॉमी सुधरेगी तो आम आदमी पर इसका असर बेहतर ही होगा।

Q: सरकार से फैसले से क्या फेक करंसी कम होगी? ये हमेशा के लिए खत्म हो गई या दोबारा से आ सकती है?
A: अभी तो फेक करंसी खत्म हो चुकी है। सरकार का कहना है कि 500-2000 के नए नोट को फेक करना मुश्किल होगा। अगर ऐसा है तो वाकई अच्छी बात है। जो भी है वो भविष्य में सामने आएगा।

Q: खबर है कि आरबीआई 50 और 100 रुपए के नए नोट लाने जा रही है। इसे भी 500 और 1000 रुपए के नोट की तरह मार्केट से हटाया जाएगा या धीरे-धीरे सिस्टम से निकाला जाएगा?
A: कोई भी सरकार 50 और 100 के नए नोट को बदलने का अचानक कदम नहीं उठा सकती। अगर ऐसा होता है तो इकोनॉमी ठप हो जाएगी।
Q: जिसका  बड़ा बिजनेस है, 5-10 लाख रुपए का कैश बैलेंस रोज मेंटेन करता पड़ता है , बड़े नोट बदलवाने जाएगा तो तो फंस तो नहीं जाएगा ?
A: कतई नहीं। जब आप रोज इतना कैश मेंटेन करते हैं तो आप रेग्युलर बिजनेस ट्रांजैक्शन दिखा सकते हैं। आप इसे रूटीन बिजनेस दिखा सकते हैं। अगर बैंक या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपसे सवाल करता भी है, तब भी आप बैंक स्टेटमेंट और अपने बिजनेस से जुड़े अकाउंट्स की डिटेल्स दिखा सकते हैं। ईमानदारी से कारोबार करने वालों को डरने की जरूरत नहीं है।

Q: 200% पेनल्टी की बात से कितना डरना चाहिए?
 बैंक में पुराने नोटों के साथ 10 लाख जमा कराने पर 3.75 लाख रुपए और 1 करोड़ रुपए की इनकम पर 84.75 लाख रुपए टैक्स पेनल्टी तभी लगेगी, जब आपके पास कालाधन है।
अगर आपने अपनी इनकम कम बताई है या गलत जानकारी दी है, तो इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 270ए के तहत आप पर बेहिसाब आमदनी पर टैक्स के बाद भी जुर्माना लगेगा।
 इस धारा के तहत आपको टैक्स के बाद 30% सरचार्ज तक देना पड़ सकता है।
 इनकम टैक्स रिटर्न के दौरान आपने जिस आमदनी का खुलासा किया है और असेसिंग ऑफिसर ने आपकी जो इनकम असेस की है, उसके डिफरेंस अमाउंट पर आपको पेनल्टी देनी होगी।
Q: अगर कोई  ढाई लाख की लिमिट से ज्यादा पैसा जमा करता है और फिर 200% पेनल्टी भी देता है , तब भी  कोई कानूनी कार्रवाई होगी?
A: तत्काल कोई कार्रवाई नहीं होगी। बैंक किसी से भी डायरेक्ट पेनल्टी वसूल नहीं करेगा। आप कितना भी कैश बैंक में अपने खाते में जमा कर सकते हैं। बैंक बाद में आपकी डिपॉजिट कैश के बारे में आईटी डिपार्टमेंट को जानकारी देगा। आईटी डिपार्टमेंट आपकी इनकम और जमा किए गए कैश को लेकर जरूरत पड़ने पर पूछताछ कर सकता है। अघोषित आय पर आपसे 200% पेनल्टी ली जा सकती है। आईटी डिपार्टमेंट ने एक बार पेनल्टी ले ली, तो आगे आपके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

Q: जिसके पास बड़ा अमाउंट है। उसे लेकर बैंक जाना पड़े तो क्या एहतियात रखें?
A: बिजनेसमैन हैं तो बुक्स ऑफ अकाउंट्स मेंटेन रखें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की आगे होने वाली किसी भी इन्क्वायरी में वह आपके काम आएगी। सैलरीड प्रोफेशनल हैं तो आपके पास मौजूद कैश के सोर्स की सारी रसीदें रखें।

Q: किसी व्यक्ति के यदि कई  बैंक खाते हैं और उनमें से हर एक में कुछ पैसा जमा है, जिसे बार-बार निकालना होता है। क्या वह भी निशाने पर होगा ?
A: नहीं। अगर आपके ये सेविंग्स अकाउंट्स हैं, तो कोई दिक्कत नहीं होगी। हां, अघोषित आय पर आपसे आईटी डिपार्टमेंट सवाल-जवाब कर सकता है।

Q : यदि किसी ने कुछ दोस्तों को करीब 10 लाख रुपर उधार दे रखे हैं। अब वह  उनसे पैसा कैसे वापस ले ?
A : दिक्कत हो सकती है, क्योंकि यह पैसा कैश में लिया नहीं जा सकता।  दोस्त को आईटी रूल्स के मुताबिक, लोन की 20,000 हजार की लिमिट के बाद टैक्स देना होगा।

Q: कोई जानना चाहता है कि  उधार लिए हों तो क्या करे ? घर में शादी है? 10 लाख रुपए रिश्तेदारों, दोस्तों और अपनी सेविंग्स के थे। अब 2.50 लाख के ऊपर क्या बैंक को दे दे ?
A: अच्छा होगा कि वह रिश्तेदारों और दोस्तों को पैसा वापस दे दें, ताकि वह पैसे अपने-अपने बैंक अकाउंट में जमा कर सकें। आप अपने कैश के साथ भी ऐसा ही कर सकते हैं।

Q: लोगों को पता है कि 30 दिसंबर तक पुराने नोट को जमा कर सकते हैं। इसके बाद आरबीआई में जमा करने की कैपिसिटी और प्रॉसेस क्या होगी?
A: ऐसा लोगों की फैसिलिटीज के लिए किया गया है। आप जायज वजह बताकर आरबीआई में पुराने नोटों को जमा कर सकते हैं। पुराने नोट जमा करने में कोई दिक्कत नहीं आने वाली। 

Q: 500 और 1000 के पुराने नोट 11 नवंबर के बाद कोई लेता है तो क्या होगा? क्या अब इन नोटों से कोई लेन-देन नहीं कर सकते हैं?
A: यह लेने वाले शख्स पर निर्भर करेगा। कोई भी इन 500 और 1000 के नोट को फिलहाल 31 मार्च, 2017 तक बदल सकता है।

Q : अगर कोई शख्स 5 लाख, 10 लाख, 20 लाख, 30 लाख, 40 लाख या फिर 1 करोड़ जमा करता है तो कितनी पेनल्टी देनी होगी?
A : देखिये अघोषित आय पर ही सब कुछ निर्भर है। इस अघोषित आय पर 45% टैक्स देना होगा। पेनल्टी का स्लैब तय नहीं है। ये इनकम टैक्स डिपार्टमेंट तय करेगा। अगर इसमें जेल जाने का कोई प्रावधान है तो इसे बाद में देखा जाएगा।

Q: अगर कोई शख्स पैसे जमा कर रहा है तो उसे क्या सावधानियां रखनी होंगी?
A: इसमें अलग-अलग बातें हैं। ब्लैकमनी वाले सोच रहे हैं कि अलग-अलग हिस्सों में या फिर दूसरे शख्स के नाम से जमा करूंगा तो ठीक रहेगा। लेकिन किस शख्स ने कितना जमा किया, पैन कार्ड से पता चल जाएगा। वहीं, जो लोग व्हाइट मनी जमा कर रहे हैं, उनके लिए घबराने वाली बात नहीं है। बस उनका अमाउंट टैक्स से मिसमैच नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो उनसे जवाब-तलब हो सकता है।

Q: बैंक काउंटर से सीधे कितने पैसे निकाले जा सकते हैं?
A: बैंक काउंटर से (चेक या विड्रॉवल से) एक दिन में 10 हजार और हफ्ते में 20 हजार रुपए निकाल सकते हैं।

Q : किसी ने यदि मकान लेने के लिए बिल्डर को ब्लैक में काफी पैसा दिया । बाद में मकान बेचना चाहें तो क्या होगा?
A : सबसे ज्यादा असर रियल एस्टेट पर पड़ा है, क्योंकि वहां कैश एक तरह से बंद ही हो गया था। अब आप जो भी बिल्डर को दे रहे हैं, वो व्हाइट में ही देना होगा। जिन्होंने ब्लैक में ज्यादा कैश देकर कम पैसे की रजिस्ट्री कराई थी और ये सोचा था कि बेचकर कमा लेंगे, ऐसा करने वालों को घाटा होगा। वो सारा कैपिटल गेन में आ जाएगा। ब्लैक में दिए गए पैसे नहीं मिलेंगे।

Q : अगर 10 लाख जमा किया जाता है तो क्या टैक्स और पेनल्टी मिलाकर 3.75 लाख रुपए काट लिए जाएंगे?
A : जरूरी नहीं है। हो सकता है कि आपकी सालाना इनकम 15 लाख रुपए हो। इसमें से अगर आपके पास कहीं की बचत के 6 लाख रुपए हैं और बाकी 4 लाख रुपए आपको किसी से बकाए या इनकम के तौर पर मिले हैं तो आप वैलिड डॉक्युमेंट्स अपने पास रखें। सोर्स के हिसाब से टैक्स लगेगा। लेकिन ये जरूरी नहीं है कि पूरे 10 लाख रुपए पर टैक्स और पेनल्टी मिलाकर आपसे 3.75 लाख रुपए वसूल लिए जाएं।

Q : आप सामान्य तौर पर लोगो को क्या सलाह देना चाहेंगे ?
A : देखिये , इस पूरी प्रक्रिया में जनसामान्य को घबराने की कोई जरुरत नहीं है। आम आदमी को इसमें कोई दिक्कत अब नहीं आने वाली। दिक्कत उन्हें जरूर आएगी जिन्होंने इतने के बाद भी बड़ी संख्या में नोट दबा कर रखा है। जनसामान्य तो रोज कमाता है और खर्च करता है।  नौकरीपेशा वाला हर काम सैलरी से ही करता है। किसान के पास कॅश होता ही नहीं। उसे हर सेशन में उधार लेना पड़ता है।  अभी जो दिक्कत दिख रही है वह तात्कालिक है। सामान्य व्यक्ति के लिए रास्ते और भी सुगम होंगे। दिक्कत नॉट दबाने वालो को अवश्य झेलनी पड़ेगी। अभी जो यह सोच कर बैठे है की कोई रास्ता निकाल सकेंगे , वे भ्रम में है , उन्हें भी चाहिए की बैंक में पैसे जमा कर के उचित कर दाखिल कर दे।  बाद में उनके पास पश्चाताप के कुछ हाथ नहीं आने वाला।