प्रोटोनिक वे ऑफ़ लाइफ

युग इलेक्टॉनिक युग है। हर और इलेक्ट्रॉनिक्स का दखल है। मनुष्य के जीवन का आधार ही इलेक्ट्रॉनिक वस्तुए बन गयी हैं। आदमी पूरी ताऊ पर इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओ पर आश्रित हो कर रह गया है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स से बहुत गहरे तक जुड़ा हुआ है। चाहे मोबाइल हो, टीवी हो , खाना बनाने के उपकरण हो , पानी गरम करने और ठंडा करने के उपकरण हो, दवाओ के माध्यम हो। कंप्यूटर हो , बिजली , पंखे, एसी या अन्य ऐसे अनेक सामान हैं जिनका उपयोग हर आदमी दिन भर कर रहा है। 


कहने का तात्पर्य यह है की आज की जीवन चर्या पूरी तौर पर इलेक्टॉनिक महल में चल रही है। हमारे चारो और केवल इलेक्ट्रॉन्स का ही बोलबाला है, फैलाव है,, विस्तार है। हम पूरी तौर पर २४ घंटे केवल इलेक्ट्रॉनिक महल में जी। इसी में सांस ले रहे हैं। ऐसे में हमारी सभी अन्तःस्रावी ग्रंथियों पर भी इलेक्ट्रॉन्स का गहरा असर पद रहा है। प्रचरता हमें कहा ले कर जा रही है इस पर कोई सोच नहीं रहा। इसके प्रभाव और इसकी गतिशीलता मनुष्य को किस रूप में कितना प्रभावित कर रही है इस पर सोचने समझने की हमें फुर्सत ही नहीं रह गयी है। 
इलेक्ट्रॉन्स को लेकर यह बात इसलिए लिखने की जरूरत महसूस हो रही है क्योकि इलेक्ट्रॉन्स की धर्मिता से आम आदमी बिलकुल परिचित नहीं है। जो जानकार है उनको मालूम है की जिन परमाणुओ से मिल कर हमारे शरीर की कोशिकाएं बानी हैं उन परमाणुओ के तीन प्रमुख बाग़ होते हैं। शरीर कोशिकाओ तक सीमित श्रिष्टि के प्रत्येक पदार्थ का गठन इन्ही परमाणुओ से हुआ है। इन परमाणुओ में एक धनात्मक अवयव होता है जिसे प्रोटोन कहा जाता है। एक अवयव होता है जो रीनात्मक होता है वह इलेक्ट्रान कहलाता है। एक तीसरा अवयव भी होता है जिसे न्यूट्रॉन कहते है। आज हमारी पूरी जीवन शैली में इलेक्ट्रान का प्रभुत्व है। यह इलेक्ट्रान केवल रीनात्मक होता है। इसमें केवल नेगेटिव गन ही होते हैं। आज इसी ऋणात्मक ऊर्जा में हम सभी सांस ले रहे हैं। हमारे हर और यही ऋणात्मक धारा प्रवाहित हो रही है। हम जितने भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस्तेमाल करते हैं सभी में यही ऋणात्मक धारा बहती है। हर घर का हर आदमी आज इसी ऋणात्मक धरा से लिपट कर जीवन जी रहा है। अब आप खुद सोचिये की जहा केवल ऋणात्मक यानी नकारात्मक ऊर्जा ही सभी को सभी और से घेरे हुए है इस महल में किसी से आप ध्नत्मक… यानी पॉजिटिव एनर्जी , सोच की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। इस नकारात्मक जीवन शैली में फिर नकारात्मक सोच और नकारात्मक विचारो की प्रधानता तो बढ़ेगी हि. इसको आप कैसे रोक सकते हैं। फिर इस इलेक्ट्रान की एक और विशिष्ट होती है की वह जहा अपने से ज्यादा ऋणात्मकता पाटा है उस और ही बढ़ कर मिल जाता है। अर्थात एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण यदि हम प्रयोग कर रहे हैं तो उसका और भी व्यापक असर दूसरे उन उपकरणों के कारण है जिनका प्रयोग भले ही हम नहीं कर रहे लेकिन उनकी नकारात्मक ऊर्जा हमारे पास आ रही है।
मनुष्य के जीवन को इसी नकारात्मकता से बचाने और जीवन में सर्थक। धनात्मक गुणों के विकास के लिए भारत संस्कृति न्यास लगातार रहा है। शोध टीम ने इस नकारात्मकता से मनुष्य को मुक्ति दिलाने कई उपाय तलाशे हैं। इन्ही में एक उपाय है प्रोटोनिक वे ऑफ़ लाइफ का। प्रोटोनिक वे ऑफ़ लाइफ के माध्यम से भारत संस्कृति न्यास बहुत जल्दी ऐसे कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है जहा से लोगो को पॉजिटिव एनर्जी के साथ , सकारात्मक सोच के साथ जीवन को जीने और आनंद से रहने की विधि बतायी जायेगी। भारत संस्कृति न्यास की प्रोटोनिक वे ऑफ़ लाइफ योजना में शामिल होकर आप अपने जीवन को सुखी और आनंदित बना सकेंगे, यह हमारा विशवास है।

संजय शांडिल्य
अध्यक्ष
भारत संस्कृति न्यास
नयी दिल्ली
९४५०८८७१८६

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